Spring Semester 05: Location: Always On हिन्दी तन्वी थर्ड ईयर में है, और अगले हफ़्ते उसका इंटर्नशिप टेस्ट है। मीरा फ़र्स्ट-ईयर में है, और तन्वी उसकी मेंटर है। तो। दो रेज़िस्टर, पैरेलल में। करंट का क्या होता है? वो... बँट जाता है? बँट जाता है। बढ़िया। अब, कितना करंट जाता है— सॉरी, तन्वी दी। सॉरी। एक सेकंड। ...छोटे वाले में से? सॉरी, सॉरी। वो बस... दो मिनट। देखो? लाइब्रेरी। नोट्स। तन्वी दी। हैलो। मैं ही नोट्स हूँ। हाँ। हाँ, शेयर कर दूँगी। ओके। बाय। सेफ़्टी के लिए है। उसे ये जानना अच्छा लगता है कि मैं सेफ़ हूँ। स्वीट है न? हम्म। करंट। छोटे वाले में से। आज तुम बेंच पर अकेली थीं। रोहन कहाँ है? मैंने अन्ना से अलग बेंच माँग ली। कोई बात नहीं। अकेले मैं जल्दी काम करती हूँ। कब से? जब से... उसे रोहन पसंद नहीं है। रोहन बहुत... मतलब। फ़्रेंडली है। तुम्हारा लैब पार्टनर वो तय करता है? तय नहीं करता। फ़िक्र करता है। उसने मेरे पासवर्ड भी माँगे थे। ईमेल, सब कुछ। हम कुछ नहीं छुपाते। और तुम्हारे पास उसके हैं? वो कहता है, उसे देने की ज़रूरत नहीं। उसके पास छुपाने को कुछ नहीं है। मीरा, ये तो— एक बात पूछूँ? जवाब देना ज़रूरी नहीं है। ठीक है। क्या तुम उसे बेझिझक ना कह पाती हो? मैं क्यों... मतलब... पूछ रहा है, कि मैं चलते-चलते रुक क्यों गई। आज जवाब देना ज़रूरी नहीं। मैं बस दो कमरे छोड़कर हूँ। कभी भी। ठीक है। सॉरी, तन्वी दी। देव, तुम्हारी बारी। और इस बार निशाना लगाकर। निशाना तो मैं हमेशा लगाता हूँ, सर। बोर्ड हिल जाता है। ग्यारह बज गए। कस्टम्स चेक, भाइयों। रोज़ रात ग्यारह बजे। इतनी पंक्चुअल तो वॉर्डन की हाज़िरी भी नहीं होती। हाँ, स्क्रीन शेयर कर रहा हूँ। ये मम्मी हैं। ये क्रिकेट ग्रुप... इसकी चैट्स, इससे ज़्यादा तो वो पढ़ती है। क्यूट है, यार। मतलब उसे परवाह है। है न, जोसेफ़ सर? हर रात तुम्हारा फ़ोन चेक करना कंट्रोल है, साहिल। चाहे कोई भी करे। बाद में कॉल करता हूँ। एक गेम और? ...एक और। आज रात नहीं। मीरा? इतनी सुबह उठ गईं? मैं ठीक से सोई ही नहीं। आपने पूछा था न, कि क्या मैं उसे बेझिझक ना कह पाती हूँ। कल रात मैंने ना कहा। एक कॉल को। फिर? उसने नौ बार कॉल किया। बीस मिनट में। नौ। आप मेरे साथ चलेंगी? फ़राह मैम के पास? सॉरी, मुझे पता है आपका टेस्ट है। मेरा टेस्ट ग्यारह बजे है। फ़राह मैम नौ बजे से बैठती हैं। काफ़ी टाइम है। चलो। मीरा ने इसे परवाह कहा। साहिल ने क्यूट। कंट्रोल को अक्सर परवाह समझ लिया जाता है। ये धीरे-धीरे ऊपर चढ़ सकता है। पूछना, कि कहाँ हो। फ़ोन और पासवर्ड चेक करना। लोकेशन ट्रैक करना। किससे मिलें, इस पर रोक लगाना। मीरा का बॉयफ़्रेंड चारों पायदान चढ़ चुका था। “पहुँचकर मैसेज कर देना, अगर चाहो तो”, ये परवाह है। “लोकेशन हमेशा शेयर रखो, अपना पासवर्ड दो”, ये कंट्रोल है। भारतीय न्याय संहिता के तहत, स्टॉकिंग में ये भी शामिल है, कि कोई पुरुष किसी महिला के इंटरनेट, ईमेल या किसी भी और तरह के इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन के इस्तेमाल की निगरानी करे। ये अपराध है। ये लड़कों के साथ भी होता है। दो हज़ार छब्बीस की एक भारतीय स्टडी में, यूनिवर्सिटी के तीन सौ सत्तानवे लड़कों में से, साढ़े पैंसठ प्रतिशत ने, पिछले एक साल में टेक्नोलॉजी के ज़रिए डेटिंग में हिंसा की बात बताई। इसका संबंध ज़्यादा एंग्ज़ायटी और कम आत्मसम्मान से पाया गया। जब कोई स्टूडेंट आपको बताए, तो सुनिए। उनकी बात पर यक़ीन कीजिए। दोष मत दीजिए। पूछिए कि उन्हें क्या चाहिए। उनकी सुरक्षा के बारे में सोचिए। विकल्प बताइए। रेफ़र कीजिए। और जाँच-पड़ताल मत कीजिए। न फ़ोन पढ़िए, न दूसरे इंसान से पूछताछ कीजिए। तन्वी ने एक सवाल पूछा, और जवाब के लिए एक हफ़्ता इंतज़ार किया। क्या तुम चाहोगी कि तन्वी यहीं रहे? थोड़ी देर के लिए। सॉरी। इस कमरे में सॉरी की ज़रूरत नहीं। जहाँ से चाहो, शुरू करो। वो चेक करता है। मैं कहाँ हूँ, किसके साथ हूँ। उसके पास मेरे पासवर्ड हैं। मैंने अपना लैब पार्टनर तक छोड़ दिया। सब कहते हैं, इसका मतलब है वो मुझसे प्यार करता है। और तुम क्या कहती हो? मैं कहती हूँ, मैं थक गई हूँ। क्या ये मेरी ग़लती है? पासवर्ड तो मैंने ही दिए थे। नहीं। उस पर भरोसा करके, तुमने कुछ ग़लत नहीं किया। तन्वी। जाओ। तुम्हारा टेस्ट। बाद में मैसेज करना? बाद में। तुम चाहती हो कि आगे क्या हो? अपने लिए। मैं सोना चाहती हूँ। लाइब्रेरी में बैठना चाहती हूँ, बिना ये बताए कि मैं कहाँ हूँ। तो सुरक्षा से शुरू करते हैं। अभी, क्या उसे पता है कि तुम कहाँ हो? हाँ। क्या तुम चाहती हो कि उसे पता हो? नहीं। तो तैयारी करते हैं, कि वो इसे कैसे लेगा। नए पासवर्ड। एक दोस्त, जिसे पता हो। एक जगह, जहाँ जा सको, अगर वो गुस्से में आ धमके। क्या वो यहीं का स्टूडेंट है? सेकंड ईयर। तो इंटरनल कम्प्लेंट्स कमेटी एक विकल्प है। आज, बाद में, या कभी नहीं। फ़ैसला तुम्हारा है। मैं उसे किसी मुसीबत में नहीं डालना चाहती। बस चाहती हूँ कि ये रुक जाए। तो वहीं से शुरू करते हैं। और गुरुवार को तुम फिर आना। आप मेरे मम्मी-पापा को बताएँगी? नहीं। तुमसे पूछे बिना नहीं। बस एक अपवाद है: अगर मुझे चिंता हो कि किसी की जान ख़तरे में है। नींद कैसी आ रही है? पहले से बेहतर। कल रात फ़ोन दराज़ में सोया। और तुम? अपने बिस्तर पर। आम इंसानों की तरह। वो गुस्से में है। मैंने फ़राह मैम को बता दिया। उसके लिए भी हमारे पास प्लान है। तो। दो रेज़िस्टर, पैरेलल में। छोटे वाले में से? ज़्यादा करंट। ज़ाहिर है। इस हफ़्ते ये आज़माइए: ये क्रम याद कीजिए। सुनना, यक़ीन करना, दोष न देना, पूछना, सुरक्षा, विकल्प, रेफ़र करना। और याद रखने के लिए, एक वाक्य। प्यार को पासवर्ड की ज़रूरत नहीं होती। अगर इस एपिसोड ने आपकी अपनी ज़िंदगी की किसी बात को छुआ हो, तो मदद से जुड़ी जानकारी और सोर्स, इस वीडियो के नीचे दिए गए हैं। अगले हफ़्ते फिर मिलेंगे।